नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश के कई राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों (LG) की नियुक्तियों में बड़ा फेरबदल किया है। इस फेरबदल में अनुभवी कूटनीतिज्ञों, पूर्व सैन्य अधिकारियों और कद्दावर राजनेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
राज्यों के नए राज्यपालों की सूची
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बिहार: सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
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महाराष्ट्र: तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र की जिम्मेदारी दी गई है।
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तेलंगाना: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना भेजा गया है।
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नागालैंड: बिहार बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व स्पीकर नंद किशोर यादव नागालैंड के राज्यपाल बने हैं।
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पश्चिम बंगाल: तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
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तमिलनाडु: केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
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हिमाचल प्रदेश: लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है।दिल्ली और लद्दाख के उपराज्यपालों (LG) में बदलाव
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दिल्ली: पूर्व राजनयिक और अमेरिका में भारत के राजदूत रहे तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू को पीएम मोदी का करीबी और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने वाला रणनीतिकार माना जाता है।
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लद्दाख: दिल्ली के निवर्तमान LG विनय कुमार सक्सेना को अब लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। सक्सेना अपने कॉर्पोरेट अनुभव और KVIC के सफल नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं।
प्रमुख चेहरों का परिचय
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नंद किशोर यादव (नागालैंड): बिहार भाजपा के सात बार के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष। 2025 चुनाव न लड़ने के बाद से ही उनके राज्यपाल बनने की अटकलें थीं।
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तरनजीत सिंह संधू (दिल्ली): 35 साल का कूटनीतिक करियर। श्रीलंका में हाई कमिश्नर और जर्मनी में कॉन्सुल जनरल रह चुके हैं।
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शिव प्रताप शुक्ला (तेलंगाना): यूपी के गोरखपुर से आने वाले बड़े ब्राह्मण चेहरा और पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री।
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कविंदर गुप्ता (हिमाचल प्रदेश): जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम और आरएसएस के पुराने कार्यकर्ता, जिन्होंने आपातकाल के दौरान जेल भी काटी।
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सीवी आनंद बोस: केरल से आने वाले रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और लेखक। इन्होंने मोदी सरकार के ‘किफायती आवास’ एजेंडे को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
इन नियुक्तियों के माध्यम से केंद्र सरकार ने अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। विशेष रूप से दिल्ली में एक पूर्व राजनयिक की नियुक्ति और बिहार में एक पूर्व सैन्य अधिकारी को भेजना प्रशासनिक और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

