बागेश्वर सरकार के दिव्य दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब; बुजुर्ग को ₹50,000 नगद , अनवर अली बने आदर्श दास के अलावा 543 लोगों की हुई ‘घर वापसी’
कोरबा, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस । कोरबा जिले के ग्राम ढप ढप में इन दिनों आस्था और भक्ति की बयार बह रही है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा यहाँ भव्य हनुमंत कथा का वाचन किया जा रहा है। 28 मार्च से शुरू हुए इस पांच दिवसीय आयोजन के चौथे दिन (मंगलवार) ‘दिव्य दरबार’ सजा, जहाँ न केवल चमत्कारिक पर्चे निकले, बल्कि मानवता और सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था के कई भावुक दृश्य भी देखने को मिले।


भावुक क्षण: बेसहारा बुजुर्ग को बाबा ने मंच से दी ₹50,000 नगद सहायता
दिव्य दरबार के दौरान एक अत्यंत भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया। पाली क्षेत्र के ग्राम मोंगड़ी से आए एक बुजुर्ग की अर्जी बाबा ने स्वीकार की। जब बुजुर्ग मंच पर पहुँचे, तो उन्होंने बताया कि वे पैदल चलकर दरबार तक आए हैं। बुजुर्ग ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उनकी पत्नी, बेटा और बहू अब इस दुनिया में नहीं हैं; परिवार के नाम पर उनके पास सिर्फ एक छोटा नाती है।बुजुर्ग की दयनीय स्थिति देख पंडित धीरेंद्र शास्त्री भावुक हो उठे। उन्होंने तत्कालअपने पास से ₹50,000 की नकद सहायता बुजुर्ग को सौंपी। नगद राशि सौंपते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यह 50000 मुझे अस्पताल के लिए दान में मिला है लेकिन अब यहां तुम्हारा हुआ इसे तुम रख लो इसके अलावा महाराज ने सामने बैठे कुछ लोगों से भी पैसे लेकर बुजुर्ग की झोली में डाल दिए।
भक्तों से भी मदद की अपील की, जिससे मौके पर ही एक बड़ी धनराशि और एकत्रित हो गई।अपने सेवकों को आदेश दिया कि बुजुर्ग को ससम्मान गाड़ी से उनके घर तक छोड़ा जाए।इस दृश्य को देख पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और ‘बागेश्वर सरकार की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा।

सनातन धर्म में वापसी: अनवर अली बने आदर्श दास
आज का दरबार सामाजिक सद्भाव और धर्म परिवर्तन की खबरों के लिए भी चर्चा में रहा। एक मुस्लिम दंपति ने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाने की इच्छा जाहिर की। अनवर अली नामक व्यक्ति ने बिना किसी दबाव के अपनी आस्था प्रकट करते हुए सनातन धर्म को श्रेष्ठ बताया। विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान पूर्वक उनका शुद्धिकरण कराया गया। बाबा ने अनवर अली को नया नाम ‘आदर्श दास दिया। इसी के साथ, 543 ऐसे लोग जो पूर्व में सनातन धर्म छोड़ चुके थे, उनकी भी विधिवत ‘घर वापसी’ कराई गई।


लाखों की भीड़
दिव्य दरबार के कारण आज कार्यक्रम के समय में परिवर्तन किया गया था। दोपहर 1:00 बजे से शुरू हुआ दरबार शाम 4:00 बजे तक चला, जिसके बाद 4:30 बजे से हनुमंत कथा प्रारंभ हुई। कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा था, स्थिति यह थी कि बड़ी संख्या में लोग पंडाल के बाहर खड़े होकर भी बाबा के दर्शन और कथा का लाभ ले रहे थे।

कल कथा का अंतिम दिवस है। मंच से ही पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पंडाल में बैठे लाखों श्रद्धालुओं को बताया कि कल 1 अप्रैल दिन बुधवार कथा का अंतिम दिवस है कल कथा सुबह 12:00 बजे से प्रारंभ होकर 2:00 बजे तक होगी उसके बाद वे अपने धाम वापस लौट जाएंगे।



