नई दिल्ली। मराठी प्ले पार्टी 1976 पर बनी बॉलीवुड की क्लासिक फिल्म पार्टी (Party 1984) सिनेमा की क्लासिक कल्ट मूवीज में गिनी जाती है। नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NFDC) निर्मित पार्टी का निर्देशन गोविंद निहलानी (Govind Nihalani) ने किया था। यह पैरलल सिनेमा की फिल्म थी। इस फिल्म को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में भी ऑफिशियल एंट्री मिली थी।
गोविंद निहलानी के करियर की बेस्ट मूवीज में शुमार
गोविंद निहलानी को आर्ट फिल्मों के लिए जाना जाता है। मंथन, अंकुर, भूमिका और निशांत जैसी आर्ट सिनेमा की फिल्मों की सिनेमैटोग्राफी कर चुके गोविंद ने बतौर निर्देशक आक्रोश, विजेता, अर्ध सत्य और अघात जैसी फिल्में बनाईं। उनकी बेहतरीन पेशकश में एक नाम पार्टी का भी है, जो साल 1984 में रिलीज हुई थी।
यह फिल्म पाखंड और सोशलाइट्स की खोखली सोच पर तंज कसती है। कई परतों से गुजरती फिल्म की कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी। मनोहर सिंह, विजया मेहता, रोहिनी हट्टंगडी, ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, अमरीश पुरी, दीपा साही और शफी इनामदार जैसे कलाकारों से सजी पार्टी को दर्शकों ने खूब सराहा था। फिल्म को 7.4 IMDb रेटिंग मिली। पार्टी में ऊंचे तबके के लोगों की असलीयत से रूबरू कराती है और उन पर तीखा व्यंग्य छोड़ती है।
समाज को आईना दिखाती है फिल्म
फिल्म की कहानी एक हाई प्रोफाइल पार्टी के इर्द-गिर्द घूमती है जो नेशनल लिटरेसी अवॉर्ड जीतने वाले दिवाकर बर्वे (मनोहर सिंह) के लिए रखी गई है। इसे होस्ट दमयंती (विजया मेहता) ने किया है। इस जश्न के बीच गपशप का बाजार गर्म होता है और दबी आवाज में चर्चाएं शुरू होती हैं कि क्या वाकई दिवाकर बर्वे इस अवॉर्ड के हकदार थे या उन्हें यह अवॉर्ड सिर्फ चापलूसी या फिर विधवा मिडल एज की दमयंती के प्रेमी होने की वजह से दिया गया। अगर एक आर्टिस्ट पॉलिटिकली करेक्ट नहीं है तो उसकी कला बेकार है… यह बात बार-बार बेचैनी बढ़ाता है।
पार्टी का क्लाइमैक्स उड़ाता है होश
फिल्म की सुई अमृत (नसीरुद्दीन शाह) पर आकर अटकती है जो एक टैलेंटेड लेखक और कवि होने के साथ-साथ एक्टिविस्ट भी है। पार्टी में ऊंचे तबके के लोग ऐसा मानते हैं कि नेशनल लिटरेसी अवॉर्ड के हकदार वास्तव में अमृत थे। पार्टी में तीखे और बेरुखे बयानों की गूंज में फिल्म का क्लाइमैक्स दिल दहला देने के लिए काफी है। आखिर में मालूम पड़ता है कि अमृत को लेफ्ट विंग टेररिस्ट बताकर उसी वक्त मार दिया जाता है, जब दिवाकर पार्टी का जश्न मना रहा होता है।
सीधे टीवी पर रिलीज हुई थी पार्टी मूवी
फिल्म की कहानी को दर्शकों ने खूब सराहा। यह फिल्म आज भी गोविंद निहलानी की बेस्ट डायरेक्टोरियल मूवी और नसीरुद्दीन शाह समेत बाकी कलाकारों की बेहतरीन परफॉर्मेंस बताई जाती है। यहां तक कि मोहिनी के किरदार के लिए रोहिनी को नेशनल अवॉर्ड भी मिला। मगर क्या आपको पता है कि यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हुई थी।
सिनेमाघरों में क्यों रिलीज नहीं की गई पार्टी मूवी
जी हां, पार्टी को सिनेमाघरों में रिलीज नहीं किया गया था। यह फिल्म सीधे टीवी पर प्रीमियर की गई थी। कहा जाता है कि यह इंडियन न्यू वेव या पैरेलल सिनेमा मूवमेंट का हिस्सा थी। ये फिल्म एक्सपेरिमेंटल थीं, इनमें डायलॉग ज्यादा थे और ये आर्ट-हाउस थीम पर फोकस्ड थी। फिल्म सोशल सटायर वाली थी और इसमें मनोरंजन के लिए कोई डांस या म्यूजिक नहीं था। इसलिए सिनेमाघरों में फिल्म को रिलीज करने की हिचकिचाहट थी। हालांकि, इसे बैन नहीं किया गया। बाद में मेकर्स ने बड़े पर्दे की बजाय फिल्म को सीधे टीवी पर ही रिलीज कर दिया।