“The Art and Science of Plant Identification: A Hands-on Workshop” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन


शासकीय ई. वि. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोरबा के तत्वाधान में सिकास्ट प्रायोजित

“The Art and Science of Plant Identification: A Hands-on Workshop” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन

 भरत यादव /छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस. News

कोरबा / छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, रायपुर (छ.ग.) के सौजन्य से वनस्पति शास्त्र विभाग शासकीय ई.वि. स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोरबा के तत्वाधान में “The Art and Science of Plant Identification: A Hands-on Workshop” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल, प्रभावी एवं भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पौधों की पहचान का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों पक्षों से अवगत कराना, उनके शोध कौशल का विकास करना तथा जैव-विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आर. बी. शर्मा महोदया ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “प्रकृति हमारी सबसे बड़ी प्रयोगशाला है और पौधों की सही पहचान पर्यावरणीय संतुलन, औषधीय अनुसंधान तथा जैव-विविधता संरक्षण की आधारशिला है।” उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने, वैज्ञानिक जिज्ञासा बनाए रखने और शोध के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय परिवार की ओर से इस अवसर पर विशेष रूप से डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, रायपुर (छ.ग.) के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया गया। उनके मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने कार्यशाला को उच्च स्तरीय अकादमिक आयाम प्रदान किया। विज्ञान एवं शोध के क्षेत्र में उनके सतत योगदान से प्रदेश में वैज्ञानिक चेतना एवं नवाचार को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है।

 शैक्षणिक कार्यक्रम/कार्यशाला के सफल आयोजन में विशिष्ट संसाधन व्यक्ति (Resource Person) के रूप में पधारे श्री अनुराग द्विवेदी वनस्पति विज्ञान विभाग, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ का महाविद्यालय परिवार द्वारा हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

श्री द्विवेदी ने अपने गहन शोध अनुभव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं विषय की व्यापक जानकारी के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान किया, बल्कि व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया। उनके प्रभावशाली व्याख्यान एवं सरल, संवादात्मक प्रस्तुति शैली ने विद्यार्थियों में विषय के प्रति नवीन जिज्ञासा और अनुसंधान भावना को जागृत किया। महाविद्यालय प्रशासन ने उनके बहुमूल्य समय, मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी संबोधन के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम की सफलता में उनके योगदान को सदैव स्मरणीय बताया गया।

कार्यशाला के विषय विशेषज्ञों ने पौधों की पहचान की पारंपरिक एवं आधुनिक दोनों विधियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने आकृतिविज्ञान (Morphology), वर्गिकी (Taxonomy), द्विविकल्पी कुंजी (Dichotomous Key), हर्बेरियम निर्माण तकनीक, फ्लोरा के उपयोग तथा डिजिटल पहचान उपकरणों एवं मोबाइल एप्स की उपयोगिता को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

कार्यशाला की विशेषता इसका ‘हैंड्स-ऑन’ सत्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों को महाविद्यालय परिसर एवं आसपास उपलब्ध विभिन्न पौधों के नमूनों के माध्यम से प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने पत्तियों की संरचना, पुष्प विन्यास, तनों की विशेषताओं, बीज एवं फलों के आधार पर पौधों की पहचान करना सीखा। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान की पुनरावृत्ति हुई, बल्कि उन्हें शोध कार्य के लिए आवश्यक अवलोकन एवं विश्लेषण कौशल भी प्राप्त हुए। प्रतिभागियों ने हरबेरिम बनाने की तकनीक एवम फ़्लोरा के उपयोग करने की तकनीक भी सीखी।

कार्यशाला के दौरान जैव-विविधता संरक्षण, स्थानीय वनस्पतियों के महत्व तथा औषधीय एवं आर्थिक दृष्टि से पौधों की उपयोगिता पर भी सार्थक चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच पौधों की वैज्ञानिक पहचान और संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। आयोजन समिति द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं वनस्पति स्नातकोत्तर के छात्र छात्राएं उपस्थित रहें।
इस सफल आयोजन में वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ संदीप शुक्ला संयोजक एवम श्री सुशील अग्रवाल आयोजन सचिव थे। महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों, अतिथि व्याख्याताओं, स्ववित्तीय अध्यापक, विद्यार्थी एवं महाविद्यालय परिवार के कर्मचारियों का सक्रिय एवं सराहनीय योगदान रहा। संपूर्ण कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं ज्ञानवर्धक रहा, जिसने विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति नई जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित किया।

यह कार्यशाला न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक पहल भी सिद्ध हुई।

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