INDIA. मध्य प्रदेश की चर्चित तहसीलदार अमिता सिंह तोमर आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गई हैं। कभी कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख जीतकर सुर्खियों में आईं यह अफसर अब करोड़ों के घोटाले में गिरफ्तारी के बाद चर्चा में हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली और श्योपुर पुलिस ने ग्वालियर स्थित घर से उन्हें दबोच लिया।
2.57 करोड़ का ‘बाढ़ राहत घोटाला’… फर्जी खातों में पैसा!
Amita Singh Tomar मामला 2021 का है, जब वह बड़ौदा तहसील में पदस्थ थीं। आरोप है कि बाढ़ राहत के नाम पर 2.57 करोड़ रुपये की राशि में बड़ा खेल किया गया। जांच में सामने आया कि 794 हितग्राहियों की सूची में से 127 फर्जी निकले और उनके खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर कर दिए गए। कई खाते तहसील क्षेत्र के बाहर के पाए गए, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए।
110 आरोपी, कई पटवारी भी घेरे में
इस सनसनीखेज केस में कुल 110 लोग आरोपी हैं। इनमें 25 से ज्यादा पटवारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच आगे बढ़ते ही अमिता सिंह तोमर पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी थी, जिसके बाद आखिरकार कार्रवाई हो गई।
23 साल की नौकरी, 25 ट्रांसफर… फिर भी विवाद पीछा नहीं छोड़ा
2003 में नायब तहसीलदार के रूप में सेवा शुरू करने वाली अमिता सिंह तोमर का करियर ट्रांसफर और विवादों से भरा रहा। तहसीलदार बनने के बाद 14 साल में 25 बार ट्रांसफर झेल चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने तबादले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान को पत्र भी लिखा था।
सोशल मीडिया पोस्ट भी बनी मुसीबत
अगस्त 2024 में प्रियंका गांधी को लेकर विवादित पोस्ट ने भी उन्हें सुर्खियों में ला दिया था। बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनकी आईडी हैक हो गई थी। राहुल गांधी को लेकर भी की गई टिप्पणियों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
KBC से जेल तक… कहानी ने सबको चौंकाया
2011 में केबीसी सीजन-5 में 50 लाख जीतकर पहचान बनाने वाली अमिता सिंह तोमर की यह गिरावट लोगों को हैरान कर रही है। एक ओर चमकदार पहचान, दूसरी ओर करोड़ों के घोटाले का आरोप… अब पुलिस पूछताछ में कई और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

