भक्ति और उत्साह का सैलाब: जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंजी ऊर्जाधानी कोरबा
करमा-मांदर की थाप पर झूमे श्रद्धालु, जगह-जगह भंडारे और महाप्रसाद का वितरण
कोरबा/ छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस न्यूज़: ऊर्जाधानी कोरबा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा शुक्रवार को पूरी आस्था, श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ निकाली गई। इस महा-आयोजन में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि शहर की सड़कें जनसमुद्र में तब्दील हो गईं। भगवान के दर्शन और रथ खींचने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे मार्ग में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्णा’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
सीतामढ़ी में विधि-विधान से पूजा, उमड़ा जनसैलाब
रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण शहर के सीतामढ़ी स्थित प्राचीन राम-जानकी मंदिर रहा। यहाँ सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान का दौर चलता रहा। जैसे ही भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा को रथ पर विराजमान कर मंदिर परिसर से बाहर लाया गया, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। भगवान के रथ की एक डोर थामने और उसे खींचने के लिए बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में गजब का उत्साह देखा गया।
दादर बस्ती में 125 वर्षों की ऐतिहासिक परंपरा
शहर से सटे दादर बस्ती में आस्था और आपसी भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिला। यहाँ 125 वर्षों पुरानी ऐतिहासिक परंपरा का निर्वाह करते हुए पारंपरिक रूप से रथ यात्रा निकाली गई। इस ग्रामीण परिवेश की यात्रा में न केवल दादर, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। बुजुर्गों के अनुसार, यह यात्रा सदियों से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रही है।

दीपका में भी बिखरी जगन्नाथ महोत्सव की छटा
उपनगरीय क्षेत्र दीपका भी पूरी तरह जगन्नाथ जी के रंग में रंगा नजर आया। यहाँ समिति द्वारा राधा-कृष्ण मंदिर के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर से भव्य रथ यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच यह यात्रा दीपका कॉलोनी का भ्रमण करते हुए दीपेश्वरी मंदिर पहुंची, जहां यात्रा का समापन हुआ। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान का भव्य स्वागत किया और आरती उतारी।

आकर्षण का केंद्र रहे सांस्कृतिक रंग,करमा और मांदर की थाप पर थिरके कदम
इस वर्ष रथ यात्रा में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली। यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर और करमा की थाप पर युवा और महिलाएं जमकर थिरके। वहीं, कई टोलियों द्वारा गाए जा रहे जसगीतों और भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जगह-जगह आरती और भंडारे, पुलिस के पुख्ता इंतजाम
छप्पन भोग और महाप्रसाद यात्रा मार्ग में कदम-कदम पर श्रद्धालुओं ने रथ को रोककर भगवान की आरती उतारी और फूल-मालाएं अर्पित कीं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों द्वारा जगह-जगह स्टॉल लगाकर शीतल जल, शरबत, फल और भंडारे के रूप में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था
इतने बड़े आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सीतामढ़ी, दादर और दीपका के संवेदनशील चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई थी। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।
आस्था और संस्कृति का बेजोड़ संगम
कोरबा की यह रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर आस्था, लोक-संस्कृति और सामाजिक समरसता का बेजोड़ संगम साबित हुई। भक्ति, संगीत और सामुदायिक एकता के इन अद्भुत दृश्यों ने इस वर्ष की रथ यात्रा को हर शहरवासी के लिए यादगार बना दिया।

