सर्वमंगला मंदिर में विधि-विधान से ‘घट स्थापना’, आस्था के 8000 ज्योति कलशों से जगमगाया दरबार


सर्वमंगला मंदिर में विधि-विधान से ‘घट स्थापना’, आस्था के 8000 ज्योति कलशों से जगमगाया दरबार

कोरबा।छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी के तट पर स्थित मां सर्वमंगला मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का आगाज अत्यंत हर्षोल्लास के साथ हुआ। आज, 19 मार्च से शुरू हुए इस नौ दिवसीय उत्सव के प्रथम दिन विधि-विधान से घट स्थापना की गई। मंदिर परिसर में इस वर्ष आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जहां देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा लगभग 7000 रशीद काटी गई थी जो देर शाम तक कुल 8000 तक पहुंच गई अब 8000 मनोकामना ज्योति कलश से माता का मंदिर जगमगा रहा है।

भक्ति और आस्था का केंद्र

राजपुरोहित नमन पांडे ने बताया कि मां सर्वमंगला के प्रति भक्तों की अटूट आस्था है। यहाँ केवल कोरबा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों और सात समंदर पार विदेशों से भी श्रद्धालु माता आस्था रखते हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन मां आदिशक्ति के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है और यह स्थिरता व शक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

बढ़ती गर्मी और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं: धूप से बचाने के लिए मंदिर परिसर में विशेष शेड लगाए गए हैं। भक्तों के लिए शीतल और शुद्ध पेयजल की सुलभ व्यवस्था की गई है। कतारबद्ध होकर दर्शन करने के लिए बैरिकेडिंग और वॉलिंटियर्स की तैनाती की गई है।

सुरक्षा के कड़े पहरे

भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘सर्वमंगला पुलिस सहायता केंद्र’ पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस बल के साथ-साथ अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। मंदिर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी को रोका जा सके और श्रद्धालु शांतिपूर्वक दर्शन कर सकें।

आज नवरात्रि के प्रथम दिवस मां शैलपुत्री की पूजा विधि विधान से हुई साथ ही घट स्थापना की पूजा हुई… श्रद्धालुओं के द्वारा लगभग 8000 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं…प्रतिदिन मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों का श्रृंगार और पूजन किया जाएगा। प्रबंधन का प्रयास है कि दूर-दराज से आने वाले किसी भी भक्त को असुविधा न हो।

— नमन पांडे, राजपुरोहित