भक्ति के रंग में रंगा गांगपुर: आचार्य योगेश्वरानंद के भजनों पर थिरके श्रद्धालु, हवन सहस्त्रधारा और महाभंडारे के साथ भागवत कथा का भव्य समापन


भक्ति के रंग में रंगा गांगपुर: आचार्य योगेश्वरानंद के भजनों पर थिरके श्रद्धालु, हवन सहस्त्रधारा और महाभंडारे के साथ भागवत कथा का भव्य समापन

 

कोरबा/ छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस : आस्था, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के सात दिनों के संगम के बाद रविवार को ग्राम गांगपुर में श्रीमद् भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक समापन हुआ। 1 फरवरी से शुरू हुई ज्ञान की इस पावन गंगा ने 8 फरवरी 2026 को सहस्त्रधारा हवन और विशाल भंडारे के साथ विश्राम लिया। समापन के इस अवसर पर पूरा क्षेत्र कृष्णमय नजर आया और हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने इस आध्यात्मिक यज्ञ में अपनी आहुति दी।

जब व्यासपीठ से उतरी भक्ति: भजनों पर झूमे आचार्य और भक्त

कथा के अंतिम दिन का नजारा तब ऐतिहासिक हो गया जब विदाई की बेला में भक्ति का अनूठा ज्वार उमड़ा। सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य योगेश्वरानंद महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि पांडाल में बैठा हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो गया।
भजनों की मधुर तान छिड़ी तो आचार्य स्वयं को रोक नहीं पाए और मंच से उतरकर श्रद्धालुओं के बीच पहुंच गए। महाराज जी को झूमते देख पूरा पांडाल ‘जय श्री कृष्णा’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा और भक्त भक्ति के आनंद में सराबोर होकर देर तक नाचते रहे।

 

सहस्त्रधारा हवन से शुद्ध हुआ वातावरण

पूर्णाहुति के अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सहस्त्रधारा पूजन संपन्न हुआ। इस विशेष अनुष्ठान के दर्शन के लिए गांगपुर के अलावा आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु उमड़े। आयोजन समिति और ग्रामीणों ने बताया कि इस कथा के माध्यम से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है और लोगों को जीवन जीने का आध्यात्मिक मार्ग मिला है।

विशाल भंडारे में उमड़ा जनसैलाब

धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के पश्चात महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन किया गया। हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी ग्रामीण अंचलों में धर्म और अध्यात्म की जड़ें बेहद गहरी हैं।

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