रायगढ़। रायगढ़ पुलिस ने फर्जी अंकसूची के माध्यम से डाकपाल की नौकरी प्राप्त करने का प्रयास करने वाले एक महिला और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने भारतीय डाक विभाग की ग्रामीण डाकसेवक भर्ती में फर्जी 10वीं की मार्कशीट अपलोड कर ऑनलाइन आवेदन किया था। दस्तावेज सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़ा उजागर होने पर सिटी कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लेकर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है, जबकि इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता अभी फरार है।
भर्ती के बाद दस्तावेज सत्यापन के दौरान प्रस्तुत अंकसूचियों को संबंधित शिक्षा बोर्ड तमिलनाडु से सत्यापित कराया गया। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि ये अंकसूचियां बोर्ड द्वारा जारी ही नहीं की गई हैं। इसके बाद डाकघर अधीक्षक रायगढ़ संभाग ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 59/2026 धारा 420, 467, 468, 471, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को सक्ती क्षेत्र से हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नौकरी की तलाश के दौरान उनकी पहचान कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर से हुई थी, जिसने नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये की मांग की। नरेन्द्र कुमार ने उसे करीब साढ़े तीन लाख रुपये दिए, जबकि सोनम साहू ने चयन के बाद भुगतान करने की बात कही थी। आरोप है कि उसी ने फर्जी मार्कशीट उपलब्ध कराई, जिसे जानते हुए भी दोनों ने आवेदन में इस्तेमाल किया। सत्यापन में फर्जी दस्तावेज सामने आने पर नियुक्ति निरस्त कर दी गई।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकली और वास्तविक शैक्षणिक दस्तावेज जब्त किए हैं। मामले का मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है। गिरफ्तारी और जांच कार्रवाई में कोतवाली थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने युवाओं से अपील की है कि शासकीय नौकरियों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध होती है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने की कोशिश दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि नौकरी के नाम पर दलालों और बिचौलियों के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

