कोरबा में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विश्व आदिवासी मूल निवासी दिवस महोत्सव का भव्य समापन
छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज राजेंद्र सिंह दीवान रहे मुख्य अतिथि
जल, जंगल, जमीन और संस्कृति का संरक्षण केवल आदिवासियों का ही नहीं, पूरे समाज का दायित्व
कोरबा। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस. News: आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा में आयोजित तीन दिवसीय ‘अंतरराष्ट्रीय विश्व आदिवासी मूल निवासी दिवस महोत्सव’ का भव्य एवं गरिमामय माहौल में समापन हुआ। इस विशाल आयोजन में 42 जनजातियों के समाज प्रमुखों सहित आम जनता ने भारी संख्या में भाग लिया और पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह (सोनाखान) के वंशज राजेंद्र सिंह दीवान उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बी. एस. पैंकरा ने की, जबकि सर्व समाज कोरबा के जिलाध्यक्ष सेवक राम मरावी अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचस्थ रहे।
सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा और नशामुक्ति पर बल
मंचीय उद्बोधन में अतिथियों ने अपनी रूढ़िजन्य परंपराओं, आदिम सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक खेलों और शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए नशा उन्मूलन अभियान को गति देने तथा वैचारिक एवं सामाजिक एकता बनाए रखने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के स्थापित वर्ग—अधिकारियों, कर्मचारियों और व्यापारियों—को वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करते हुए समाज के उत्थान में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

प्रकृति के रक्षक के रूप में आदिवासी समाज
शक्तिपीठ के संरक्षक रघुवीर सिंह मार्को ने व्यापक सामाजिक विषयों पर विचार व्यक्त किए। तत्पश्चात, शक्तिपीठ के संरक्षक मोहन सिंह प्रधान ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के सबसे करीब रहकर जीवन जीता आया है। जंगल, पहाड़, नदियां और जमीन उनके लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित ‘विश्व आदिवासी दिवस’ इसी वैश्विक विविधता और मानवीय दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
श्री प्रधान ने प्रागैतिहासिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव विकास यात्रा में आदिवासियों ने सदैव प्रकृति और पूर्वजों की उपासना पद्धतियों को सहजता से स्वीकार किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आधुनिक विकास की अंधी दौड़ भले ही तात्कालिक सुख दे, लेकिन पर्यावरण का विनाश भविष्य के मानव जीवन के लिए घातक सिद्ध होगा। इसलिए जल, जंगल और जमीन का संरक्षण केवल आदिवासियों का ही नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति का भी मिशन होना चाहिए।


शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पहली प्राथमिकता
संबोधन के अंत में वक्ताओं ने शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य और रोजगार-व्यापार को प्रथम प्राथमिकता पर रखकर संपूर्ण समाज को एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प दिलाया। साथ ही, गांवों में चलाए जा रहे नशामुक्ति अभियानों में और अधिक तेजी लाने की बात कही गई।
सहयोगियों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त
कार्यक्रम के अंत में शक्तिपीठ की ओर से सभी 42 जनजातियों के प्रमुखों, अतिथियों, नागरिकों तथा शक्तिपीठ के संरक्षक मंडल, पदाधिकारी मंडल, युवा प्रकोष्ठ, शंभू शक्ति सेना, जंगो रायतार मातृशक्ति संघ, समस्त अधिकारी-कर्मचारी संघ और चिकित्सकों का आभार प्रकट किया गया।
विशेष रूप से रक्तदान शिविर के प्रतिभागियों, भोजन व सुरक्षा व्यवस्था में लगे साथियों, सांस्कृतिक विभाग के प्रमुख रूपेंद्र सिंह पैंकरा एवं उनकी टीम, तथा पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताओं (व्याख्याता अशोक नायक, पीडिया एवं राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय कबड्डी रेफरी) के निर्णायक मंडलों व पूरी कमेटी के सदस्यों की दिन-रात की मेहनत की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।


