सूरत से पलायन: न काम बचा न चूल्हा जला, गैस की किल्लत ने मजदूरों को गांव लौटने पर किया मजबूर


सूरत से पलायन: न काम बचा न चूल्हा जला, गैस की किल्लत ने मजदूरों को गांव लौटने पर किया मजबूर

 

गुजरात / छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के औद्योगिक शहरों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। गुजरात के सूरत में गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने-अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर एलपीजी गैस की कमी ने छोटे उद्योगों और फैक्ट्रियों पर भी असर डाला है। एलपीजी गैस की कमी के चलते कई फैक्ट्रियां अस्थायी रूप से बंद हो रही हैं। मजदूरों के सामने रोजगार और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

प्रवासी मजदूर सचिन ने बताया कि हम गांव जा रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ दिनों से गैस नहीं मिल रही है। हमारी कंपनियां भी बंद हो रही हैं। इसलिए क्या करें, भूखे मर रहे तो वापस गांव जा रहे हैं। हमारे पास पैसे नहीं हैं इसलिए वापस लौट रहे हैं। कोशिश की गैस पाने की, लेकिन सब अपना-अपना देखते हैं। यहां कोई मदद नहीं कर रहा। गैस सप्लाई शुरू होने पर ही लौटेंगे। बहुत लोग वापस जा रहे हैं।

सचिन ने आगे बताया कि 4-5 दिनों से ज्यादा परेशानी हो रही है। 500 रुपये लीटर गैस मिल रही है और पैसे भी नहीं हैं। इसलिए गांव जा रहे हैं। वहीं प्रवासी मजदूर सीमा देवी ने कहा कि गैस की समस्या के कारण मैं अपने गांव लौट रही हूं। हमारे खाते बंद हो रहे हैं और पैसे भी नहीं हैं। जो भी मजदूरी करते हैं और 500-1000 रुपये उसमें डालते हैं, वो भी नहीं मिल रहे और गैस भी नहीं मिल रही। यह पूछने पर कि गैस कब से नहीं मिल रही, सीमा देवी ने कहा कि पिछले 15 दिनों से गैस नहीं मिल रही। एक हफ्ते पहले गैस खत्म हो गई थी फिर गैस की कमी हो गई। सीमा देवी का कहना है कि एजेंसी पर भी गए लेकिन अभी तक गैस नहीं मिली। मैं और मेरी बेटी जा रहे हैं जबकि पति और दो बच्चे यहीं रहेंगे। छोटे सिलेंडर तक नहीं मिल रहे हैं।