
बरमपुर, राताखार और कसनिया से 1 टीपर और 2 ट्रैक्टर को जब्त
बड़ा सवाल: एनजीटी (NGT) के कड़े नियमों के बावजूद आखिर क्यों नहीं थम रहा ‘रेत चोरों’ का दुस्साहस?
कोरबा | 24 जून 2026l छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस. News
कोरबा जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वाले खनिज माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की कार्रवाई की है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के सख्त निर्देश और उप संचालक (खनि प्रशासन) के मार्गदर्शन में 24 जून को जिले भर में एक विशेष अभियान चलाया गया। खनिज विभाग की टीम ने जिले के कई संवेदनशील और संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ धावा बोला। छापेमारी की इस जद में मुख्य रूप से सलिहाभाटा, भैसामुड़ा, कटबिटला, कुदमुरमाल, सोनपुरी, सीतामढ़ी, बरमपुर, राताखार, पोड़ी, कछार, चुहिया, बाल्को, कसनिया और कटघोरा शामिल है।

कार्रवाई की बड़ी बातें: गाड़ियां जब्त, अवैध स्टॉक सील
सघन जांच के दौरान टीम ने मौके पर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन करते हुए रंगे हाथों गाड़ियों को जप्त किया है। जिसमें बरमपुर, राताखार और कसनिया से 1 टीपर और 2 ट्रैक्टर को जब्त किया गया। इन्हें क्रमशः सर्वमंगला पुलिस चौकी, रामपुर थाना और खनिज जांच चौकी (रामपुर कटघोरा) की अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। ठीक इसी तरह कछार में रेत के 2 बड़े अवैध भंडारण (600 घन मीटर और 720 घन मीटर) तथा सोनपुरी में 1 अवैध भंडारण (300 घन मीटर) को जब्त किया गया। विभाग ने कुल 1620 घन मीटर अवैध रेत को सील कर दिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और शासकीय राजस्व की हानि को रोकना है।
बड़ा सवाल: कार्रवाई के बाद भी ‘बेखौफ’ क्यों हैं रेत चोर?
प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई की सराहना तो हो रही है, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। प्रतिबंध होने के बावजूद नदी-नालों से अवैध रूप से रेत का निकाला जाना बदस्तूर जारी है।


NGT के नियमों को दिखाया जा रहा ‘ठेंगा’
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट नियम हैं कि 10 जून से 15 अक्टूबर तक मानसून के दौरान नदियों के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए रेत उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। लेकिन कोरबा में रेत माफिया बेखौफ होकर नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं और एनजीटी के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।

आखिर डर क्यों नहीं?
बार-बार होने वाली जब्ती और जुर्माने के बाद भी ऐसा प्रतीत होता है कि खनिज चोरी करने वालों के मन में कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है। मोटी कमाई के लालच में ये माफिया हर कार्रवाई के बाद फिर सक्रिय हो जाते हैं।
अब देखना यह होगा कि खनिज विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद क्या वास्तव में ‘रेत चोर’ शांत बैठेंगे या फिर से नदियों को खोखला करने का खेल शुरू हो जाएगा? जनता की नजरें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।


