रायपुर/ कोरबा। कार्यालय कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी, कोरबा द्वारा भारत सरकार, गृह मंत्रालय, जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के जारी निर्देश अनुसार कोरबा जिले में सर्व चार्ज अधिकारी आयुक्त, नगर पालिक निगम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी,नगर पालिका परिषद, कटघोरा / दीपका/बांकीमोंगरा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत छुरीकला / पाली को निर्देशित किया गया है।
👉🏻प्रथम चरण में जनगणना 2027 के लिए मलिन बस्तियों (स्लम) की जनसांख्यिकी हेतु मलिन बस्ती को चिन्हित कर गणना ब्लॉक गठित किया जाना है। चार्ज अधिकारियों को कहा गया है कि स्लम बस्ती की पहचान के लिए जिले के प्रत्येक नगरीय निकाय के द्वारा मलिन बस्ती की जानकारी भरकर जनगणना निदेशालय को प्रेषित किया जाना है। अधिसूचित मलिन बस्ती के संबंध में अधिसूचना की प्रति एवं मान्यता प्राप्त मलिन बस्ती के संबंध में सामान्य सभा अथवा संबंधित नगरीय निकाय द्वारा जारी आदेश/पत्र की प्रति अनिवार्य रूप से सलंग्न किया जावे। यदि किसी नगरीय निकाय में मलिन बस्ती क्षेत्र नहीं है, तो निरंक जानकारी प्रेषित किया जावेगा।
👉🏻 2011 के अनुसार छग में 2582 मलिन बस्तियां
भारत में इक्कीसवी (21) सदी के आरंभ से औद्योगिक विकास, आर्थिक अवसरों तथा निरंतर हो रहे प्रवास के कारण शहरीकरण में सतत वृद्धि देखी गई है। भारत में, शहर सदैव आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं, जो बेहतर आजीविका की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों के लोगों को आकर्षित करते हैं। हालांकि, तीव्र जनसंख्या वृद्धि तथा अपर्याप्त शहरी नियोजन के परिणामस्वरूप उपलब्ध भूमि एवं अवसंरचना पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न हुआ है। इन्हीं परिस्थितियों ने मलिन बस्तियों के विस्तार को बढ़ावा दिया है- खराब तरीके से निर्मित आश्रयों का समूह जहाँ पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, जलनिकास तथा अपशिष्ट निपटान जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव होता है। मलिन बस्तियों के वृद्धि में योगदान देने वाले प्रमुख कारणों में भूमि की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि, शहरी गरीबों के लिए किफायती आवास कार्यक्रमों की कमी तथा अपर्याप्त भौतिक बुनियादी ढांचे के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों से निरंतर होता प्रवासन शामिल हैं। फलस्वरूप, अनौपचारिक बस्तियाँ और अवैध रूप से विकसित आवासीय समूह अधिकांश महानगरों की एक सामान्य विशेषता बन गई हैं, जिससे आवश्यक सेवाओं की मांग और आपूर्ति के बीच और अधिक अंतर बढ़ा है तथा शहरी जीवन की समग्र गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जनगणना 2011 के दौरान देशभर में कुल 1.23 लाख एवं छत्तीसगढ़ राज्य में 2582 मलिन बस्ती गणना ब्लॉक दर्ज किए गए थे, और मलिन बस्तियों की कुल जनसंख्या देश में 6.55 करोड़ एवं छत्तीसगढ़ राज्य में 18.98 लाख थी। मलिन बस्तियों के सुधार/पुनर्वास के लिए प्रभावी एवं समन्वित नीति तैयार करने हेतु इनके संबंध में व्यापक एवं सुसंगत जानकारी उपलब्ध होना अनिवार्य है।
👉🏻तीन श्रेणी में रखी गई हैं मलिन बस्तियां
जनगणना 2011 की तरह ही, जनगणना 2027 में भी मलिन बस्तियों को तीन श्रेणियों -अधिसूचित (notified), मान्यता प्राप्त (recognised) और चिन्हित (identified) में विभाजित किया जाएगा।
(i) अधिसूचित मलिन बस्तीः किसी नगर या शहर में राज्य केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अथवा स्थानीय सरकार द्वारा किसी भी अधिनियम (जिसमें ‘मलिन बस्ती अधिनियम’ भी शामिल है) के अंतर्गत ‘मलिन बस्ती’ के रूप में अधिसूचित सभी क्षेत्रों को अधिसूचित मलिन बस्ती माना जाएगा और इन्हें कोड 1 दिया जाएगा।
(ii) मान्यता प्राप्त मलिन बस्तीः राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अथवा स्थानीय सरकार, हाउसिंग एवं स्लम बोर्डों द्वारा ‘मलिन बस्ती’ के रूप में मान्यता प्राप्त वे सभी क्षेत्र, जिन्हें किसी अधिनियम के अंतर्गत औपचारिक रूप से मलिन बस्ती के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है, मान्यता प्राप्त मलिन बस्ती मानी जाएंगी और इन्हें कोड 2 दिया जाएगा।
(iii) चिन्हित मलिन बस्तीः कम से कम 300 की जनसंख्या तथा/अथवा लगभग 60-70 परिवारों की रिहाइश वाले कमजोर बने हुए, सघन एवं संकरे मकानों का क्षेत्र, जो अस्वच्छ वातावरण में स्थित है जहाँ सामान्यतः मूलभूत सुविधाएँ अपर्याप्त होती हैं तथा सफाई एवं पेयजल की उपयुक्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं। चार्ज अधिकारी द्वारा ऐसे क्षेत्रों की पहचान किया जाना है तथा जनगणना कार्य निदेशालय (DCO) के एक अधिकारी द्वारा इसका निरीक्षण भी किया जाएगा। चार्ज रजिस्टर में ऐसे सभी क्षेत्रों के संबंध में उचित प्रविष्टियाँ दर्ज किया जाना आवश्यक है। ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित मलिन बस्ती माना जाएगा और इन्हें कोड 3 दिया जाएगा।
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