
दीपका में तहसील और स्कूल के पास शराब दुकान खोले जाने का पार्षद और अधिवक्ताओं ने किया विरोध
प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र में मधुशाला के प्रस्ताव से गहराया विवाद; एसडीएम ने किया निरीक्षण
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस. NEWS / भरत यादव
कोरबा /दीपका। नगर पालिका परिषद दीपका में शराब दुकान के प्रस्तावित स्थानांतरण को लेकर जनआक्रोश चरम पर है। तहसील कार्यालय और शैक्षणिक संस्थानों के पास नई शराब दुकान खोले जाने के फैसले के खिलाफ जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध वर्ग ने मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में कांग्रेस के वर्तमान पार्षद कमलेश जायसवाल, पूर्व पार्षद रोहित जायसवाल, अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

विरोध की मुख्य वजहें: जनहित और कानून-व्यवस्था पर संकट
पार्षद कमलेश जायसवाल ने इस गंभीर मामले को लेकर कलेक्टर और आबकारी विभाग को एक ज्ञापन सौंपा है। विरोध कर रहे नागरिकों और अधिवक्ता संघ का कहना है कि प्रस्तावित स्थल के पास तहसील कार्यालय है, जहाँ हर दिन सैकड़ों ग्रामीण, महिलाएँ, बुजुर्ग और छात्र-छात्राएँ अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुँचते हैं। शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी दफ्तरों के ठीक पास शराब दुकान खुलने से क्षेत्र के सामाजिक वातावरण और कानून-व्यवस्था पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। दुकान को किसी ऐसे वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, जहाँ आम जनता और विद्यार्थियों की समस्या न हो।
मौके पर पहुँचे एसडीएम, जमीनी हकीकत का लिया जायजा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कटघोरा एसडीएम तन्मय खन्ना ने दीपका पहुँचकर प्रस्तावित स्थल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक वहाँ उपस्थित थे, जिन्होंने एक सुर में प्रशासन के इस कदम का विरोध किया और अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं।
प्रशासन के सामने जमीन की कमी की चुनौती
सूत्रों के मुताबिक, दीपका नगर पालिका क्षेत्र में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी जमीन की कमी है। नगर का एक बड़ा हिस्सा वन विभाग की भूमि के अंतर्गत आता है, जिसके कारण वैकल्पिक जगह ढूंढने में मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद, स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जमीन की कमी का बहाना बनाकर बच्चों और आम जनता के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
आगे क्या….निगाहें प्रशासन के अंतिम फैसले पर टिकी
स्थल निरीक्षण के बाद एसडीएम द्वारा सभी पक्षों की आपत्तियों और सुझावों को शामिल करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि क्या जनहित को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को बदला जाएगा या नहीं।




