कटघोरा वन मंडल में हाथी का आतंक: भैंस ढूंढने निकले ग्रामीण को कुचला, मौके पर ही दर्दनाक मौत
जटगा वन परिक्षेत्र के धवलपुर गांव की घटना; वन विभाग ने दी ₹25 हजार की तात्कालिक सहायता
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस. News /29/06/2026
कोरबा /कटघोरा। जिले के कटघोरा वन मंडल के जटगा वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत धवलपुर में रविवार देर रात एक हाथी ने ग्रामीण पर जानलेवा हमला कर दिया। हाथी के कुचलने से ग्रामीण की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद से पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल है।

भैंस की तलाश में गया था जंगल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धवलपुर निवासी संतोष कुमार गोंड़ (40 वर्ष) पिता शिवमंगल सिंह, रविवार शाम को अपनी लापता भैंस को ढूंढने के लिए जंगल की तरफ गया था। देर रात करीब 9 बजे जंगल में उसका सामना अचानक एक विचरण कर रहे विशालकाय हाथी से हो गया। इससे पहले कि संतोष संभल पाता या वहां से भाग पाता, हाथी ने उस पर हमला कर दिया और बेरहमी से कुचल दिया।

परिजनों ने शुरू की तलाश, सुबह मिला शव
जब संतोष देर रात तक घर नहीं लौटा, तो परिजनों की चिंता बढ़ी और उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर उसकी तलाश शुरू की। घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, जहां संतोष का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। वन विभाग ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
₹6 लाख के मुआवजे का ऐलान
घटना के तुरंत बाद वन विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए मृतक के पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया। विभाग द्वारा परिजनों को मौके पर ही ₹25,000 की तात्कालिक राहत राशि प्रदान की गई है। वन अधिकारियों के मुताबिक, शेष ₹5,75,000 की अनुग्रह राशि सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियमानुसार जल्द ही प्रदान कर दी जाएगी।
मानव-हाथी द्वंद्व: दावों के बीच प्रशासनिक नाकामी उजागर
यह कोई पहला मामला नहीं है जब जिले में हाथी के हमले से किसी ने अपनी जान गंवाई हो। कटघोरा और आसपास के वन क्षेत्रों में मानव-हाथी द्वंद्व (Human-Elephant Conflict) थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हाथी जंगलों से निकलकर रिहायशी बस्तियों में घुस रहे हैं।
हाथी न सिर्फ ग्रामीणों के आशियानों को उजाड़ रहे हैं और फसलों को तबाह कर रहे हैं, बल्कि अब तक कई बेकसूर ग्रामीणों को मौत के घाट उतार चुके हैं। शासन-प्रशासन और वन विभाग द्वारा हाथियों को खदेड़ने और ग्रामीणों को अलर्ट करने के दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में ये तमाम प्रयास अब तक पूरी तरह नाकाम ही साबित हुए हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है।



