जब सुदामा के लिए नंगे पांव दौड़े द्वारकाधीश, तो छलक उठी भक्तों की आंखें; सर्वमंगला नगर में सुदामा चरित्र का सुंदर वर्णन
शक्ति का अहंकार ही बनता है विनाश का कारण, भस्मासुर वध प्रसंग के साथ भागवत कथा का विश्राम”


कोरबा / छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस: सर्वमंगला नगर क्षेत्र के सर्वमंगला नगर में जायसवाल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के सातवें दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति और श्रद्धा की त्रिवेणी में गोता लगाते हुए भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण और उनके अनन्य मित्र सुदामा के प्रसंग का श्रवण किया। व्यास पीठ पर आसीन पंडित प्रेम शंकर चौबे जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से सुदामा चरित्र का ऐसा सजीव वर्णन किया कि पाण्डाल में मौजूद हर आंख नम हो गई।


मित्रता की मिसाल: जब नंगे पांव दौड़े आए द्वारकाधीश
कथा प्रसंग के दौरान महाराज जी ने बताया कि मित्रता में पद, प्रतिष्ठा और धन कभी आड़े नहीं आते। जब दरिद्र ब्राह्मण सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे, तो द्वारपालों द्वारा सूचना मिलते ही भगवान कृष्ण सुध-बुध खोकर नंगे पांव ही अपने मित्र की अगवानी करने दौड़ पड़े। महाराज जी ने कहा, भगवान केवल प्रेम के भूखे हैं, वे भक्त की दरिद्रता नहीं, उसकी निष्ठा देखते हैं।” इस दौरान श्री कृष्ण, रुक्मणी और द्वारपालों की वेशभूषा में मनमोहक झांकी और नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मोहनी रूप और भस्मासुर वध का प्रसंग
कथा के क्रम में महाराज ने भस्मासुर के उद्धार की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान भोलेनाथ के वरदान का दुरुपयोग करने वाले भस्मासुर का अंत करने के लिए भगवान विष्णु को मोहनी रूप धारण करना पड़ा। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समाज को संदेश दिया कि शक्ति का अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है।


जायसवाल परिवार का जताया आभार
कथा के अंतिम दिवस पर महाराज जी ने मुख्य यजमान माधव प्रसाद जायसवाल एवं श्रीमती अनुमति जायसवाल सहित समस्त जायसवाल परिवार को इस पुनीत कार्य के लिए आशीर्वाद दिया। वहीं, आयोजनकर्ता माधव प्रसाद जायसवाल और श्रीमती भानुमति जायसवाल और ग्राम के वरिष्ठ जन रामधन पांडे ने महाराज जी की सरल और सुगम कथा शैली की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। कथा विश्राम के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।



